दोस्तो अपने बारे में क्या कहूं। टिहरी में भागीरथी से एक छोटी सी नदी मिलती थी भिलंगना (अब इस जगह पर झील है)। इसी नदी के किनारे एक छोटे से गांव में पैदाइश हुई। बचपन के कुछ दिन वहां बीते। गंगा-यमुना की घाटी में बसे देहरादून में होश संभाला। कॉलेज के आखिरी दिनों में पत्रकारिता का चस्का लगा। भारतीय जनसंचार संस्थान में दाखिला मिला तो, यमुना तीरे बसे दिल्ली का रुख कर लिया। फिर यमुना के किनारे-किनारे आगरा जा पहुंचा। दो साल आगरा में और फिर वापस दिल्ली। ...तो सफर जारी है दोस्तो।